सामग्रीः- मंत्रसिद्ध प्रार्प्रितिश्ठायुक्त वशीकरण यंत्र व तांबे का श्री यंत्र, कनक धारा यंत्र, कुबेर यंत्र, केसर, धूप(देसी घी का) अगर बत्ती गुलाब का इत्र।
माला:- वैजयन्ती माला।
समय:- दिन या रात्रि का कोई भी शुभ समय।
दिषा:- पूर्व दिषा।
जप संख्या:- इक्कीस हजार।
अवधि:- पांच, ग्यारह या अट्ठारह दिन।
मंत्र:- नमो कुबेराय वैश्रवर्ािय अक्षय समृद्धि देहि देहि कनक धारायै नमः।
प्रयोग:- यह श्रेश्ठ और एक अनुभूत प्रयोग है जातक को चाहिए कि वह किसी भी रविवार से यह प्रयोग करें, सामने सफेद वस्त्र बिछाकर बीच में कुबेर यंत्र और वशीकरण यंत्र, बांयी तरफ श्री यंत्र तथा दाहिनी तरफ कनकधारा यंत्र रख दें, सभी यंत्रों पर इत्र का लेप करें और उस पर केसर आदि से तिलक कर पुश्प चढ़ाऐं और विधिवत रूप से पूजा आदि कर के फिर जप शुरू कर दें।
जब मंत्र जप पूरा हो जाये तो तीनों यंत्रों को इसी क्रम से पूजा घर में रख दें और वशीकरण यंत्र को लाल कपड़े में रखकर जेब में रख लें, तो जीवन में किसी प्रकार की कोई कमी नही रहती है और सभी दृश्टियों से सुख समृद्धि का अटूट भण्डार बना रहता है और जिसका भी वशीकरण करना हो वह सदा आपका अपना बन कर रहता है जब भी अपने प्रेमी प्रेमिका से मिलने जाना हो तो वशीकरण इत्र लगाकर जायें तो गोली की तरह असर होगा।

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